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बारसूर-मुचनार: रोमांच, प्रकृति और आस्था का अनोखा संगम

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अतुल्य दंतेवाड़ा बना पर्यटकों का नया स्वर्ग
रायपुर।छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बारसूर और मुचनार क्षेत्र तेजी से रोमांचक एडवेंचर, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। ‘अतुल्य दंतेवाड़ा‘ अभियान के तहत विकसित ये स्थल पर्यटकों को जिपलाइन, नाइट कैंपिंग जैसे अनुभव प्रदान कर रहे हैं। सुरक्षित और सुगम सुविधाओं ने इन्हें बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़कर एक आदर्श पर्यटन गंतव्य बना दिया है।


जिपलाइन और नाइट कैंपिंग: रोमांच के नए आयाम
बारसूर-मुचनार में जिले की सबसे लंबी जिपलाइन पर्यटकों के बीच सबसे बड़ा आकर्षण बन चुकी है। ऊंचाई से जंगल और घाटियों के बीच सरकते हुए मिलने वाला यह रोमांच साहसिक पर्यटन को नई ऊंचाई दे रहा है। पर्यटक बताते हैं कि हवा की तेज रफ्तार और हरियाली का नजारा उन्हें अविस्मरणीय क्षण प्रदान करता है। इसके अलावा, नाइट कैंपिंग की सुविधा रात के जंगल को जीवंत बना रही है। तारों भरी आकाशमंडल के नीचे टेंट में ठहरना, जंगल की शीतल हवाओं और पक्षियों की चहचहाहट का आनंद लेना पर्यटकों को प्रकृति के करीब ला रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा के पूर्ण इंतजाम किए हैं, जिसमें प्रशिक्षित गाइड और आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं।
प्राचीन मंदिर और सातधार नदी: आस्था व सौंदर्य का मेल
बारसूर अपने 10वीं-11वीं शताब्दी के भव्य मंदिरों के लिए जाना जाता है, जहां नागर शैली के ये स्थापित धरोहरें इतिहास और आध्यात्मिकता का अनुपम संगम प्रस्तुत करती हैं। भगवान शिव, विष्णु और गणेश के ये मंदिर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करते हैं। धार्मिक पर्यटक यहां पूजा-अर्चना के साथ इतिहास से रूबरू हो रहे हैं। वहीं, सातधार नदी का कल-कल बहता जल और चारों ओर फैली हरियाली पर्यटकों का मन मोह रही है। नदी किनारे पिकनिक, फोटोग्राफी और ध्यान के लिए उपयुक्त यह स्थान शांति की तलाश में आने वालों के लिए वरदान साबित हो रहा है। हाल के दिनों में सैलानियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रशासन के प्रयास: पर्यटन को नई दिशा
दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ‘अतुल्य दंतेवाड़ा‘ के तहत सड़क, पार्किंग, शौचालय और होमस्टे जैसी सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। यह अभियान स्थानीय रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस और वन विभाग का सहयोग लिया जा रहा है। आने वाले समय में ट्रेकिंग और बोटिंग जैसी नई गतिविधियां जोड़ी जाएंगी। बारसूर-मुचनार न केवल रोमांच और शांति चाहने वालों के लिए बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक यात्रा के इच्छुक पर्यटकों के लिए भी आदर्श बन रहा है। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई पहचान दे रहा है।

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