Thursday, February 19, 2026
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कोटा में खनिज पट्टे की आड़ में पहाड़ों का दोहन : नियम ताक पर, पहाड़ों का सीना चीर रहे ठेकेदार

कोटा । पर्यावरण व प्रकृति के साथ साथ मानव जीवन के साथ खिलवाड़ का जीता जागता उदाहरण कोटा क्षेत्र में खनिज विभाग बिलासपुर द्वारा जारी किया गया खनिज पट्टा है। यह खनिज पट्टा अंकित मिश्रा के नाम पर ग्राम अमाली, तहसील कोटा, खसरा नम्बर 1452 रकबा 2.800 हेक्टेयर में खनिज साधारण पत्थर उत्तखनन पट्टा के रुप में 14/03/2017 से 30/03/2047 मतलब 30 साल के लिए बाकायदा खनिज नियम शर्तो के साथ जारी किया गया है लेकिन ऐसा लगता है कि पिछले 18 साल 11 महीने में इस क्षेत्र में मौका मुआयना करने खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी रुख नहीं किया है ऐसा ग्रामीणों का कहना है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी पहाड़ों के चारों तरफ हरे भरे परिपक्व वृक्ष,और शांत वातावरण के लिए पहचाना जाने वाला क्षेत्र कोटा आज पर्यावरण प्रदूषण के गंभीर संकट से जूझ रहा है।

कोटा नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकृत पत्थर उत्तखनन पट्टों के पट्टेदारों द्वारा पहाड़ी को स्वीकृत एरिया से भी अधिक उत्तखनन किया जा रहा है पहाड़ को बेतरतीब ढंग से खोदकर पत्थर निकाला जा रहा है वहीं बड़े बड़े पत्थरों को क्रेसर से तोड़ने का काम भी किया जा रहा है। जिससे निकलने वाली धूल आस पास का वातावरण पिछले 18 सालों से प्रदूषित हो रहा है लोग स्वास संबंधी रोग से ग्रसित हो रहे हैं। लेकिन
खनन ठेकेदार को इन नियम-कायदों से कोई सरोकार नहीं।

विकास खण्ड कोटा विधानसभा क्षेत्र है यहाँ जनपद और नगर पंचायत भी है लेकिन इन जनप्रतिनिधियों को भी इनकी चिंता नहीं।

कोटा एसडीएम और पुलिस प्रशासन को कम से कम इस ओर ध्यान देना चाहिए।
जिस तेजी से 2.800 हेक्टेयर से कई गुना अधिक क्षेत्र में खनिज नियमों को ताक पर रखकर ठेकेदार पहाड़ों का सीना फाड़ रहे हैं,ऐसा लगता है कि जिला और स्थानीय प्रशासन अपनी आँखें बंद कर रखा है।

पढ़े लिखे स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना वैध अनुमति, बिना पर्यावरणीय स्वीकृति और बिना सुरक्षा मानकों के दिन-रात मशीनें चल रही हैं। विस्फोट,भारी वाहनों की आवाजाही और धूल के गुबार ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि आसपास के रहवासियों की सेहत पर भी असर डालना शुरू कर दिया है।

पर्यावरणीय खतरे बढ़ रहे हैं पहाड़ियों पर वर्षों पुराने वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से भू-स्खलन का खतरा बढ़ रहा है। वर्षा के समय मिट्टी का कटाव, जलस्रोतों का सूखना और जैव विविधता का नाश जैसी समस्याएं सामने आ रहीं हैं। हरियाली खत्म होने से तापमान में वृद्धि और जल संकट की आशंका भी जताई जा रही है।

बिना रॉयल्टी गिट्टी का अवैध परिवहन कर शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

उत्तखनन एरिया से कहीं ज्यादा एरिया में अवैध खनन के कारण शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

बहरहाल आम आदमी को शुद्ध हवा, नहीं मिल रही है बेगुनाहों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है यहाँ फैले प्रदूषण के खतरनाक स्तर का जिम्मेदार कौन?

कोटा में SDM कार्यालय होने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई न होने से खनन करने वालों के हौसले बुलंद हैं?

सवाल यह है कि जिम्मेदार खनिज अधिकारी कहाँ हैं?

धारा 24 और 48 के मुताबिक ये सरकार का उत्तरदायित्व है कि वे देश के सभी नागरिकों को स्वच्छ और हितकर पर्यावरण मुहैया कराए लेकिन जिम्मेदार पर्यावरण विभाग और खनिज विभाग के अधिकारी खनन पर सख्त रोक, दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई और पहाड़ियों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए यदि समय रहते कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई तो वह दिन दूर नहीं जब कोटा के नगर वासियों को जन आंदोलन का सहारा लेना होगा!

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