Thursday, February 19, 2026
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ढाबों में रातभर खुलेआम परोसी जा रही शराब, आबकारी विभाग की “चुप्पी” पर सवाल — अनदेखी या मिलीभगत?

बिलासपुर। जिले में अवैध शराब का कारोबार अब छिपकर नहीं, बल्कि खुलेआम और बेखौफ तरीके से चल रहा है। कोटा, रतनपुर और बेलगहना क्षेत्र के कई ढाबों में दिन व रात्रि के समय खुलेआम शराब परोसी जा रही है, और शराब माफिया धड़ल्ले से सप्लाई कर रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले पर आबकारी विभाग की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है, क्योंकि न तो कार्रवाई दिख रही है और न ही छापेमारी।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि ढाबों के पास आबकारी विभाग की गाड़ी खड़ी रहती है, लेकिन उसके बावजूद कोई धरपकड़ नहीं होती। लोगों में चर्चा है कि विभाग या तो आंख मूंदकर बैठा है, या फिर कहीं न कहीं मौन सहमति/मिलीभगत के चलते यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि विभाग चाहे तो एक ही रात में कई ढाबों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं होना विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

सूत्रों के मुताबिक कोटा क्षेत्र में देशी-विदेशी मदिरा दुकानों का टेंडर शराब ठेकेदारों द्वारा नहीं लिए जाने के कारण आबकारी विभाग स्वयं सरकारी दुकान संचालन में व्यस्त है। जिन अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी अवैध शराब पर रोक लगाने, ढाबों में रेड मारने और शराब तस्करों पर कार्रवाई करने की थी, वे अब शासकीय दुकान में बैठकर बिक्री व्यवस्था संभालने में लगे हुए हैं। इसका सीधा फायदा शराब माफियाओं को मिल रहा है, जो इस मौके को “खुला मैदान” समझकर कारोबार बढ़ा रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार ढाबों में शराब परोसने से सिर्फ नियम-कानून की धज्जियां नहीं उड़ रही, बल्कि इससे क्षेत्र में अपराध, विवाद, घरेलू हिंसा और सड़क हादसों की आशंका भी बढ़ रही है। रात के समय ढाबों में शराबखोरी के बाद कई बार मारपीट, गाली-गलौज और सड़क पर उत्पात जैसी घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कुंभकर्णी नींद में नजर आ रहा है।

सबसे गंभीर बात यह है कि अवैध शराब का नेटवर्क अब गांव-गांव तक फैल रहा है। ढाबों के माध्यम से शराब माफिया लगातार मुनाफा कमा रहे हैं और लोगों में यह संदेश जा रहा है कि अब यहां पकड़ने वाला कोई नहीं। यही कारण है कि अवैध शराब बिक्री अब “सामान्य गतिविधि” बनती जा रही है।
बहरहाल, जिले में अवैध शराब का यह सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन आबकारी विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल हो रहा है, या फिर मिलीभगत के चलते माफियाओं को संरक्षण मिल रहा है?
अब देखना यह होगा कि आबकारी विभाग कब तक आंखें मूंदे रहेगा और कब अवैध शराब कारोबार पर लगाम लगाने के लिए ठोस, पारदर्शी और कठोर कार्रवाई करेगा। जनता अब सिर्फ बयान नहीं, एक्शन चाहती है।

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