
कोटा । कांग्रेस विधायक के संरक्षण व मार्गदर्शन में आयोजित निजी कबड्डी प्रतियोगिता को लेकर शिक्षा विभाग में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कोटा नरेंद्र मिश्रा ने नियमों को दरकिनार करते हुए 24 व्यायाम शिक्षकों समेत कुल 44 शिक्षकों व शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी उक्त निजी प्रतियोगिता में लगा दी है। इससे प्री-बोर्ड, बोर्ड कक्षाओं की प्रैक्टिकल परीक्षाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

जानकारी के अनुसार, यह ड्यूटी ऐसे समय में लगाई गई है जब स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षाएं, प्रैक्टिकल परीक्षाएं चल रही हैं और पांचवीं व आठवीं की केंद्रीयकृत परीक्षाएं भी प्रस्तावित हैं। शिक्षकों को शिक्षकीय कार्य के अलावा निजी आयोजन में लगाए जाने से पढ़ाई प्रभावित होने और परीक्षा परिणाम बिगड़ने का खतरा मंडरा रहा है।
शिक्षा विभाग के निर्देशों की अनदेखी
शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि शिक्षकों की ड्यूटी किसी भी निजी कार्य या आयोजन में नहीं लगाई जानी चाहिए, खासकर परीक्षा अवधि के दौरान। इसके बावजूद बीईओ द्वारा प्राचार्य, शिक्षक व सहायक शिक्षक स्तर के कर्मियों की ड्यूटी निजी कबड्डी प्रतियोगिता के संचालन में लगाए जाने को विभागीय निर्देशों की खुली अवहेलना बताया जा रहा है।

परीक्षा के अहम दौर में शिक्षकों को स्कूलों से दूर रखना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। कई स्कूलों में कक्षाएं प्रभावित हुई हैं और प्रैक्टिकल परीक्षाओं की तैयारियों पर भी असर पड़ा है।
मंत्री की फटकार का मामला भी चर्चा में
उल्लेखनीय है कि हाल ही में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बिलासपुर जिले में विभागीय समीक्षा बैठक लेने पहुंचे थे। बैठक के दौरान नियम विरुद्ध आधा दर्जन शिक्षकों के अटैचमेंट पर मंत्री ने नाराजगी जताई थी। इसी बैठक में मंत्री की फटकार के बाद कोटा बीईओ के बेहोश होने की घटना भी सामने आई थी, जो विभाग में चर्चा का विषय बनी रही।
अब सवाल यह है कि क्या परीक्षा अवधि में निजी आयोजन में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के मामले में बीईओ के खिलाफ कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।






