Homeबस्तरडेरी गड़ाई और आमा माउड़ की परंपरा से फागुन मंडई का शुभारम्भ
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डेरी गड़ाई और आमा माउड़ की परंपरा से फागुन मंडई का शुभारम्भ

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दंतेवाड़ा। बसंत पंचमी चक्रकोट (बस्तर) के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इसी शुभ अवसर पर दंतेवाड़ा स्थित देवी दंतेश्वरी माई जी के प्राण-प्रतिष्ठा पर्व फागुन मंडई का विधिवत शुभारम्भ होता है। यह पर्व आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति का अनुपम संगम है।


बसंत पंचमी के दिन प्रातःकाल शक्तिपीठ देवालय के सम्मुख डेरी गड़ाई की रस्म निभाई जाती है। इस परंपरा के अंतर्गत मंदिर के सामने एक काष्ठ स्तंभ अधिरोपित कर उसके ऊपर पुरातन त्रिशूल की स्थापना की जाती है। त्रिशूल देवी भगवती महिषासुर मर्दिनी का प्रिय आयुध माना जाता है। डेरी गड़ाई शक्ति स्थापना का प्रतीक पर्व है, जो फागुन मंडई के प्रारंभ का संकेत देता है। यह त्रिशूल होली के बाद देवी-देवताओं की विदाई तक शक्तिपीठ देवालय के सम्मुख स्थापित रहता है।


इसी दिन सायंकाल आमा माउड़ की महत्वपूर्ण रस्म संपन्न होती है। सायं समय देवी माई जी का छत्र सम्मानपूर्वक मंदिर से बाहर लाया जाता है। इस अवसर पर पुलिस जवानों द्वारा हर्ष फायरिंग कर देवी को सलामी दी जाती है। नगर के प्रमुख चौक में पहुंचकर देवी के पवित्र छत्र पर जिया बाबा, बारह लंकवार, सेवादारों एवं नगरवासियों द्वारा आम के बौर अर्पित किए जाते हैं।
आमा माउड़ का आशय है—आम के बौर का मुकुट देवी के छत्र पर अर्पित करना। इस रस्म के दौरान उपस्थित नागरिक एक-दूसरे के कानों में आम के बौर खोंसते हैं और गले मिलकर फागुन मंडई पर्व की शुभकामनाएं देते हैं।
बसंत पंचमी से प्रारंभ होकर यह पर्व फाल्गुन शुक्ल षष्ठी से होली के बाद देवी-देवताओं की विदाई तक निरंतर विभिन्न रस्मों और परंपराओं के साथ संपन्न होता है। फागुन मंडई बस्तर अंचल की जीवंत लोकपरंपरा, सामाजिक एकता और श्रद्धा का सशक्त प्रतीक है।

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