
कोटा । कोटा वार्ड क्रमांक 13 कोटसागर झालापारा के पीछे चल रहा अवैध खनन अब किसी से छिपा नहीं है। खुलेआम पहाड़ों और जमीन को खोदकर गिट्टी व बोल्डर निकाले जा रहे हैं। बिना किसी वैध पट्टा, अनुमति या पर्यावरणीय स्वीकृति के खदानों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे अवैध खनन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां क्षेत्र से गिट्टी और बोल्डर भरकर निकलती हैं। दिन हो या रात, खनन और परिवहन बेरोकटोक जारी रहता है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और आसपास रहने वाले लोगों को धूल, शोर और कंपन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रशासनिक अमला मानो सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ है।

सबसे गंभीर बात यह है कि इस अवैध खनन से शासन को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। रॉयल्टी, टैक्स और अन्य शुल्कों की चोरी खुलेआम की जा रही है। नियमों के अनुसार जिस खनिज संपदा से सरकारी खजाना मजबूत होना चाहिए, वही अवैध कारोबारियों की जेब भरने का जरिया बन गई है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि क्या बिना किसी संरक्षण के यह कारोबार इतने लंबे समय से चल सकता है?

अवैध खनन का सीधा असर पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। जमीन का कटाव बढ़ रहा है, प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और भविष्य में भू-धंसाव जैसी गंभीर समस्याओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके न तो खनिज विभाग सक्रिय दिख रहा है और न ही प्रदूषण नियंत्रण अथवा प्रशासनिक अमला।
कानून और नियमों की खुलेआम अवहेलना:
अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि यह मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह अवैध कारोबार और भी विकराल रूप ले सकता है। जनता और क्षेत्रवासी अब केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि जवाबदेही भी चाहते हैं।






