
बिलासपुर। जिले के सोढ़ाखुर्द रेत घाट में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्वीकृत घाट होने के बावजूद यहां नियमों को ताक पर रखकर माफिया खुलेआम मशीनों से नदी का सीना छलनी कर रहे हैं। प्रतिबंध के बावजूद चैन माउंटेन मशीनों से लगातार खुदाई की जा रही है, जबकि नियमानुसार मैनुअल तरीके से सीमित उत्खनन ही मान्य है।


अरपा नदी के इस घाट में सुबह से लेकर देर रात तक रेत की खुदाई जारी रहती है। भारी मशीनों के इस्तेमाल से नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बिगड़ रहा है। पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करते हुए 5 से 10 किलोमीटर के प्रतिबंधित दायरे में भी उत्खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है, जबकि National Green Tribunal (NGT) ने ऐसे क्षेत्रों में सख्त रोक लगा रखी है।

हाईकोर्ट के आदेश की भी अनदेखी
अरपा अर्पण महाभियान समिति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद Chhattisgarh High Court ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि रेत उत्खनन केवल तय नियमों और मापदंडों के तहत ही किया जाए। साथ ही NGT के दिशानिर्देशों के अनुसार ही घाटों की स्वीकृति और खुदाई सुनिश्चित करने को कहा गया था। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि न तो नियमों का पालन हो रहा है और न ही कोर्ट के आदेशों का।
माफियाओं के हौसले बुलंद, प्रशासन मौन
दिनदहाड़े मशीनों से उत्खनन और रातभर हाइवा के जरिए परिवहन यह साबित करता है कि माफियाओं को न तो प्रशासन का डर है और न ही न्यायालय के आदेशों का। जिम्मेदार अधिकारी भी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे मिलीभगत के आरोप भी उठने लगे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले रेत माफियाओं और ठेकेदारों पर प्रशासन कब कार्रवाई करेगा, या फिर अरपा नदी यूं ही अवैध उत्खनन की भेंट चढ़ती रहेगी।


