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आश्रम में कम बच्चे, कागजों में फुल हाजिरी! राशन और राशि में गड़बड़ी का आरोप

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कोटा। कोटा ब्लॉक के ग्राम कुरदर में स्थित आदिवासी बालक आश्रम कुरदर एक बार फिर विवादों में आ गया है। आश्रम के अधीक्षक पर बच्चों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर शासन से मिलने वाली राशि और राशन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगा है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार आश्रम में कुल 50 छात्रों के रहने की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में यहां लगभग 15 से 20 बच्चे ही निवास कर रहे हैं। इसके बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में 50 छात्रों की उपस्थिति दर्ज कर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। आरोप है कि इसी आधार पर मिलने वाले राशन और अन्य सुविधाओं का उपयोग वास्तविक छात्रों के बजाय अन्य कार्यों में किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि फर्जी उपस्थिति दिखाकर शासन की योजनाओं का लाभ गलत तरीके से लिया जा रहा है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि वास्तविक छात्रों को मिलने वाली सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
मामले की शिकायत मिलने के बाद जब मीडिया टीम ने आश्रम का निरीक्षण किया तो उस समय हॉस्टल अधीक्षक मौके पर मौजूद नहीं थे। निरीक्षण के दौरान रसोईघर में कढ़ाई में मछली पकती हुई मिली। इस संबंध में रसोइए से पूछताछ करने पर उसने बताया कि बच्चों को भोजन में मछली, मुर्गा और उड़द की दाल भी परोसी जाती है। रसोइए के अनुसार जब जिला स्तर के अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं, तब भी इसी प्रकार का भोजन तैयार किया जाता है।

हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा निर्धारित मेनू चार्ट से हटकर भोजन दिया जा रहा है और इसमें भी उन बच्चों के नाम पर मिलने वाले संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है, जो वास्तव में आश्रम में उपस्थित नहीं रहते। वहीं आश्रम में रह रहे कुछ बच्चों ने भी बताया कि अभी 25 है कभी 20 बच्चे ही रहते है अधीक्षक दो-तीन दिन आश्रम में मौजूद रहते।

शिकायतकर्ता शिवकुमार मरकाम, जो ग्राम पंचायत कुरदर के सरपंच प्रतिनिधि हैं, का आरोप है कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत की तो हॉस्टल अधीक्षक ने उल्टा उन पर ही रुपये मांगने का आरोप लगा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” जैसी बन गई है, जहां शिकायत करने वाले व्यक्ति को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीणों ने आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला सहायक आयुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि विभागीय स्तर पर उचित कार्रवाई नहीं होती है तो ग्रामीणों के साथ मिलकर जिला कलेक्टर बिलासपुर को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि शिकायत के बाद कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों द्वारा उन्हें फोन कर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। वहीं हॉस्टल अधीक्षक द्वारा बिलासपुर और रायपुर के कुछ मीडिया कर्मियों से अपने अच्छे संबंध होने की बात भी कही जा रही है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और आदिवासी छात्रों के लिए संचालित इस आश्रम में पारदर्शिता और व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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