Tuesday, August 4, 2026
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सार्वजनिक सीसी रोड पर हुए बोरिंग मामले में अब तक कार्रवाई नहीं, प्रशासन की चुप्पी से गहराए सवाल

प्रभात रॉय बिलासपुर। सिरगिट्टी क्षेत्र के मुख्य मार्ग से रेलवे लोको कॉलोनी जाने वाले सार्वजनिक सीसी रोड पर कराए गए कथित बोरिंग कार्य को लेकर उठे सवालों पर अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से स्थानीय नागरिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। मामले को सार्वजनिक किए जाने और समाचार प्रकाशित होने के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा न तो जांच की जानकारी दी गई है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि उक्त कार्य वैधानिक अनुमति से कराया गया था या नहीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक सीसी रोड शासन की संपत्ति है और उस पर किसी भी प्रकार का खुदाई या बोरिंग कार्य निर्धारित नियमों एवं सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता। यदि संबंधित कार्य के लिए अनुमति प्रदान की गई थी, तो प्रशासन को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि अनुमति किस विभाग ने, किस नियम के तहत और किन शर्तों के साथ दी।

दूसरी ओर यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई थी, तो यह और भी गंभीर विषय है कि सार्वजनिक मार्ग पर कार्य कैसे हो गया तथा संबंधित अधिकारियों ने समय रहते इसे रोकने या जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की पहल क्यों नहीं की।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि समाचार प्रकाशित होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन तत्काल मौके का निरीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करेगा और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई सामने नहीं आने से लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि मामला अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है।

नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े मामलों में शिकायतों और समाचारों के बाद भी प्रशासन सक्रिय नहीं होता, तो इससे नियमों के समान अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़े होना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और किसी भी मामले में प्रभाव अथवा दबाव के आधार पर भिन्न व्यवहार नहीं होना चाहिए।

क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन, नगर निगम तथा संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अनुमति से संबंधित अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं तथा यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध बिना किसी पक्षपात के विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।

फिलहाल इस पूरे मामले में संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में नागरिकों की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि पारदर्शी प्रशासन की पहचान केवल नियम बनाने से नहीं, बल्कि उनके निष्पक्ष और समयबद्ध पालन से होती है।

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