
कोटा। नगर पंचायत कोटा में लाखों रुपये की लागत से निर्मित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। प्लांट परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है, जहां शराब की खाली बोतलें, प्लास्टिक के डिस्पोजल, गुटखा पाउच और अन्य कचरा बड़ी मात्रा में बिखरा पड़ा है।


स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से प्लांट का संचालन शुरू नहीं होने के कारण परिसर पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हो गया है। नियमित निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगा है, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ गई है।

नागरिकों का कहना है कि जिस उद्देश्य से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया गया था, वह आज तक पूरा नहीं हो सका। एक ओर नगरवासियों को बेहतर पेयजल व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्लांट परिसर कचरे के ढेर में तब्दील होता जा रहा है।

अब देखना होगा कि कब तक नगर पंचायत एवं संबंधित विभाग से परिसर की साफ-सफाई कर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं कब यह स्पष्ट करते है कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट आखिर कब शुरू होगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों की लागत से तैयार इस परियोजना का लाभ जनता को कब मिलेगा और विभाग इसकी बदहाली पर कब संज्ञान लेगा?


